Machli Palan Loan Kaise Le । मत्स्य पालन लोन Online Apply कैसे करे

परिचय: भारत में एक समृद्ध और विविध समुद्री जैव विविधता है। भारत की तटरेखा 7,517 किलोमीटर लंबी है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसे ठीक से मैनेज नहीं किया जा रहा है।

इस पत्र का मुख्य उद्देश्य भारत में मत्स्य प्रबंधन और अध्ययन का पता लगाना है। यह भारत में मत्स्य प्रबंधन के सामने आने वाली चुनौतियों की भी पड़ताल करता है और वर्तमान प्रणाली में कुछ बदलावों को लागू करके इसे कैसे हल किया जा सकता है।

भारतीय तटीय जल 18,500 से अधिक मछली प्रजातियों का घर है, जिनमें व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण सार्डिन, मैकेरल, टूना, एंकोवी और हेरिंग शामिल हैं। भारतीय तट पर लगभग 12 मिलियन लोगों की अनुमानित आबादी वाले मछली पकड़ने वाले गाँवों की एक बड़ी संख्या है

जो अपनी आजीविका के लिए मछली पकड़ने पर निर्भर हैं। देश के समुद्री संसाधन महत्वपूर्ण हैं लेकिन अधिकतर प्रजातियों (एफएओ) के लिए 10-12 मिलियन टन के बीच वार्षिक पकड़ के साथ खराब प्रबंधन किया जाता है।

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फिशर्स को मछली लोन लेने की आवश्यकता क्यों है?

Machli Palan Loan Kaise Le । मत्स्य पालन लोन Online Apply कैसे करे

मछुआरों को अपने मछली पकड़ने के लिए जितने भी उपकरण हैं उन सभी के लिए ऋण की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से उन्हें ऋण की आवश्यकता हो सकती है। उदाहरण के लिए, उन्हें नए उपकरण खरीदने के लिए धन की आवश्यकता हो सकती है, या हो सकता है कि उन्होंने कुछ अप्रत्याशित खर्च किए हों, यानी ऐसे खर्चे जिनकी आशा ना रही हो कारण चाहे जो भी हो, मछली पकड़ने के लिए ऋण आवश्यकता होती है

मछली लोन लेने के लिए ऑनलाइन अप्लाई कैसे करें?

मत्स्य पालन लोन एक प्रकार का ऋण है जो विशेष रूप से मछुआरों और मछुआरिनों के लिए तैयार किया जाता है। ये लोन आम तौर पर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जाते हैं, ताकि मछली पकड़ने से अपना जीवन यापन करने वाले लोगों की मदद की जा सके।

मछली पालन लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया किसी अन्य प्रकार के लोन के लिए आवेदन करने से बिल्कुल अलग नहीं है। सबसे पहले अधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन जाना है और उस बैंक या वित्तीय संस्थान को ढूंढना है

जिसके साथ आप आवेदन करना चाहते हैं। इसके बाद, आपको एक आवेदन पत्र भरना होगा, जो आपकी व्यक्तिगत जानकारी के साथ-साथ आपकी नाव या उपकरण के बारे में जानकारी मांगता है। कुछ ऋणदाता आपको लोन देने से पहले आपके इतिहास और आपकी नाव या उपकरण के मूल्य के बारे में भी जानकारी मांग सकते हैं।

लोन के लिए आवेदन करने से पहले लोन की शर्तों के बारे?

लोन के लिए आवेदन करने से पहले सभी नियमों और शर्तों को जानना जरूरी है। ब्याज दर, चुकौती अवधि और डिफ़ॉल्ट के मामले में क्या करना है कुछ सबसे महत्वपूर्ण विवरण हैं जिनके बारे में उधारकर्ताओं को बिंदीदार रेखा पर हस्ताक्षर करने से पहले जागरूक होना चाहिए।

फिशिंग लोन ऑनलाइन प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज?

फिशिंग लोन प्राप्त करने के लिए, आपके पास एक अच्छा क्रेडिट स्कोर होना चाहिए और सुनिश्चित करें कि आपके पास एक स्थिर नौकरी है। मत्स्य पालन ऋण अक्सर असुरक्षित होते हैं। इसका मतलब है कि ऋणदाता कोई संपत्ति या मूल्‍यवान वस्‍तुएँ नहीं मांगता है। लेकिन वे आपकी लोन या ऋण चुकाने की आपकी क्षमता का कुछ प्रमाण चाहते हैं।

Machli Palan Loan Yojana, तालाब पर पट्टे के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • शपथ पत्र
  • इकरारनामा
  • मछली पालक और ग्राम पंचायत के बीच में इकरारनामा
  • तालाब की नकल हक सिजरा एंव जमाबंदी
  • दो पासपोर्ट साइज की फोटो
  • प्रशिक्षण प्रमाण पत्र

मछली पालन किसानों के लिए किस प्रकार के ऋण उपलब्ध हैं?

मछली पालन एक बहुत ही लाभदायक व्यवसाय है क्योंकि मछली अपेक्षाकृत कम लागत वाला खाद्य स्रोत है। मछली किसानों के लिए कई प्रकार के ऋण उपलब्ध हैं। इन ऋणों का उपयोग एक नया व्यवसाय शुरू करने, उपकरण खरीदने या ऋण चुकाने के लिए भी किया जा सकता है। कुछ सबसे सामान्य प्रकार के ऋणों में शामिल हैं

:- वाणिज्यिक मछली पकड़ने के ऋण: ये ऋण आमतौर पर बैंकों और वित्तपोषकों द्वारा पेश किए जाते हैं जो वाणिज्यिक मछली पकड़ने के व्यवसायों में विशेषज्ञ होते हैं। वे वित्तपोषण विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला की पेशकश करते हैं और अक्सर नावों, जालों और अन्य उपकरणों सहित आपके पूरे ऑपरेशन को वित्त प्रदान करेंगे।

:- कृषि ऋण: ये ऋण आमतौर पर बैंकों द्वारा दिए जाते हैं जो कृषि व्यवसायों में विशेषज्ञ होते हैं। वे सभी प्रकार के खेतों के लिए वित्तपोषण विकल्प प्रदान करते हैं – बड़े पैमाने के पशु फार्मों से लेकर छोटे पैमाने के पारिवारिक खेतों तक।

:- उपकरण ऋण: ये ऋण आम तौर पर बैंकों द्वारा पेश किए जाते हैं जो कृषि व्यवसायों या निर्माण कंपनियों के विशेषज्ञ होते हैं जो उपकरण पट्टे पर देने के कार्यक्रम पेश करते हैं। ये प्रोग्राम आपको आवश्यक उपकरण को एकमुश्त खरीदने के बजाय पट्टे पर देने की अनुमति देते हैं ताकि आपको इसकी आवश्यकता न पड़े

मछली पालन लोन पर कितनी ब्याज दरें होती है?

मछली पकड़ने के ऋण पर ब्याज दरें बैंकिंग क्षेत्र में प्रचलित ब्याज दरों द्वारा निर्धारित की जाती हैं। मछली पकड़ने के ऋण पर औसत ब्याज दर वर्तमान में 7% है। बैंक उन मछुआरों को कम ब्याज दर प्रदान करते हैं जो लंबे समय से व्यवसाय में हैं और उन्हें अच्छा व्यवसाय माना जाता है।

मछली पालन पर कितनी सब्सिडी मिलती है?

मछली पालन एक खाद्य उत्पादन उद्योग है जो दुनिया की आबादी का ख्याल रखता है। अगले पांच वर्षों में इसके 14% बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। यह लेख चर्चा करेगा कि मछली किसानों के लिए कितनी सब्सिडी उपलब्ध है और उन्हें किस तरह के मानदंडों को पूरा करने की आवश्यकता है।

सबसे पहले तो मत्स्य पालन के लिए आपको निवेश की जरूरत होगी। अगर आप मत्स्य पालन के लिए 1 हेक्टेयर भूमि में तालाब बनवाना चाहते हैं तो इसमें करीब 5 लाख तक का खर्च आएगा और नीली क्रांति के तहत कुल निवेश की जो 50% सब्सिडी है। वह केंद्र सरकार और 25% सब्सिडी राज्य सरकार आपको उपलब्ध करवाएगी। मतलब इस योजना के तहत आपको सिर्फ 25% धनराशि खर्च करनी पड़ेगी।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना 2022-23

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना 2022-23

पीएम की मत्स्य संपदा योजना 2022-23 मछुआरों को उनकी मछली पकड़ने वाली नौकाओं और उपकरणों की लागत के लिए 50% सब्सिडी प्रदान करने की योजना है। इस योजना का उद्देश्य मछुआरों की आजीविका में सुधार करना और भारत में मछली उत्पादन में वृद्धि करना है।

योजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा, जिसमें पहला चरण प्रायोगिक चरण होगा। योजना का पहला चरण एक पायलट चरण होगा, और पूरे भारत में 531 मछली पकड़ने वाले गांवों में 50,000 मछुआरों को लाभ मिलेगा।

इस पायलट चरण के प्रत्येक लाभार्थी को 20,000 रुपये प्रति नाव या 80,000 रुपये प्रति बेड़ा, या इससे भी अधिक की सब्सिडी प्राप्त होगी। जिन लाभार्थियों के पास नाव या बेड़ा नहीं है, वे लोग नाव या बेड़ा बनाने के लिए धन प्राप्त कर सकते हैं। सब्सिडी नई नावों के लिए 36,000 रुपये और राफ्ट के लिए 80,000 रुपये खर्च होंगे।

मछली पालन लोन कैसे मिलेगा | Machli Palan Ke Liye Loan Kha Se Mileya

मछली पालन के क्षेत्र में हमारे देश में अपार संभावनाएं देखी जाती हैं। हमारे देश में लगभग 60% लोग मछली का सेवन करते हैं क्योंकि इसमें कई तरह की प्रोटीन और विटामिन पाई जाती हैं। इसीलिए मछलियों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार बढ़ रही है। आज हम आपको बताएंगे मछली पालन व्यवसाय से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

मछली पालन लोन कैसे मिलेगा Machli Palan Ke Liye Loan Kha Se Mileya

सबसे पहले तो मत्स्य पालन के लिए आपको निवेश की जरूरत होगी। अगर आप मत्स्य पालन के लिए 1 हेक्टेयर भूमि में तालाब बनवाना चाहते हैं तो इसमें करीब 5 लाख तक का खर्च आएगा और नीली क्रांति के तहत कुल निवेश की जो 50% राशि है। वह केंद्र सरकार और 25% राशि राज्य सरकार आपको उपलब्ध करवाएगी। मतलब इस योजना के तहत आपको सिर्फ 25% धनराशि खर्च करनी पड़ेगी।

इसके लिए आपके पास पर्याप्त जलापूर्ति का साधन होना चाहिए। तालाब के बांधो को ऊँचा रखें। अगर तालाब के अंदर कहीं टीले नजर आ रहे हैं तो उसकी भी मिट्टी निकाल कर बांधो पर जमा कर दें। अप्रैल-⁠मई तक तालाब का सुधार जरूर करवा लें ताकि आपको मछली पालन के लिए समय मिल सके।

ध्यान रहे कि अगर आप नये तालाब का निर्माण करा रहे हैं तो यह चिकनी मिट्टी में अधिक उपयुक्त रहेगा, क्योंकि जल धारण की जो क्षमता है, वह चिकनी मिट्टी में अधिक पाई जाती है। मछली की अच्छी पैदावार के लिए तालाब की मिट्टी व पानी का उपयुक्त होना बेहद जरूरी है।

मंडल स्तर पर मत्स्य विभाग की प्रयोगशाला द्वारा यह जांच निशुल्क की जाती है। सही तरह से तालाब निर्माण के लिए आपको यह जांच करा लेना चाहिए। वही तालाब में आवश्यकता से अधिक जलीय पौधे नहीं होने चाहिए यानी खरपतवार नहीं होने चाहिए क्योंकि यह पौधे पानी का जो बहुत बड़ा भाग होता है, उसको घेर लेते हैं और मछलियों की अच्छी उपज के लिए हानिकारक होते हैं।

मछलियों की अच्छी उपज के लिए क्या करें?

मछलियों की अच्छी उपज के लिए आप पानी में चूने का प्रयोग कर सकते हैं। एक हेक्टेयर तालाब में 250 किलोग्राम चूने का प्रयोग बीज डालने से एक महीना पहले करना चाहिए। तालाब की तैयारी में गोबर की खाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि इससे मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन उत्पन्न होता है

तथा गोबर खाद के प्रयोग से 15 दिन के बाद रासायनिक खाद सिंगल सुपर फास्फेट 250 किलोग्राम म्यूरेट आफ पोटाश 40 किलोग्राम कुल मिश्रण 490 किलोग्राम 10 सामान मासिक किस्तों में प्रयोग किया जाना चाहिए।

अगर उर्वरकों के इस्तेमाल से पानी का रंग नीला हरा हो जाए तो उर्वरकों का प्रयोग तब तक के लिए बंद कर देना चाहिए। जब तक पानी का रंग अपनी सही स्थिति में ना आ जाए। तालाब में ऐसी मछलियों का बीज भी छोड़ना चाहिए जो एक ही वातावरण में रहकर एक-⁠दूसरे को नुकसान ना पहुंचाएं।

मछली पलकों के लिए मछलियों की बेस्ट नस्ल?

हमारे देश की मेजर काट मछलियों में कतला, रोहू, नयन और विदेशी कॉर्प में सिल्वर कॉर्प और ग्रास कॉर्प। तथा कॉमन कॉर्प का पालन ज्यादा फायदेमंद होता है। साथ ही मछली का प्राकृतिक भोजन पांल्गटन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होना चाहिए।

यह भी जान लीजिए कि कितने पानी में कितना बीज डालना चाहिए तो आप 1 हेक्टेयर जल क्षेत्र में 50 मिलीमीटर आकार से कम की 10000 तथा 50 मिलीमीटर से बड़ी 5,000 अंगुलिकाएं डाल सकते हैं और यदि देशी-⁠विदेशी मिलाकर छह प्रकार की मछलियों का पालन करना चाहते हैं

तो कतला 20%, सिल्वर कॉर्प 10%, रोहू 30%, नयन 15%, कॉमन कॉर्प 15% तथा ग्रास कॉर्प 10% रखनी चाहिए और यदि सिर्फ भारतीय मछलियों का ही पालन करना चाहते हैं तो कतला 40%, रोहू 30% तथा नयन इस अनुपात में मार्च-⁠अप्रैल महीने में डाल सकते हैं और जो कॉर्प मछलियों का बीज है। वह जुलाई-⁠अगस्त सितंबर में प्राप्त किया जा सकता है।

मछलियों के बीज कहां से प्राप्त करें

मत्स्य पालन विभाग अभिकरण से संपर्क करें। यह हर जिले में होता है। आप यहां से बीज से संबंधित जानकारी ले सकते हैं। साथ ही मछली की अच्छी पैदावार के लिए उन्हें पूरक आहार मिला भी बेहद जरूरी है जो आहार मछलियों को दे रहे हैं।

वह प्राकृतिक आहार की भांति मछलियों के लिए पोषक होना चाहिए। आपको प्रोटीन युक्त आहार का उपयोग करना चाहिए। जैसे मूंगफली, सरसों, नारियल और चावल का कना यानी जो चावलका चौका होता है, उसे बराबर मात्रा में मिलाकर कुल भाग 1 से 2% तक रोज दिया जाना चाहिए। अब
आपको बताते हैं

मछलियों को होने वाले प्रमुख रोग और उनके उपचार?

अक्सर मछलियों को वैक्यूमाइसेस रोग हो जाता है। इसके लक्षण है। गलफडो़ का सड़ना दम घुटने के कारण रोग ग्रस्त मछली ऊपरी सतह पर हवा लेने का प्रयत्न करती है। इसका उपचार है प्रदूषण की रोकथाम। तालाब में पानी के स्तर को बढ़ाना या प्रति हेक्टेयर 50 से 100 किलोग्राम तक चूने का प्रयोग करना।

यदि शुरुआती अवस्था में मछलियों के पंखों के किनारे सफेदी आने लगे तो यह फिश तथा तेल रोग हो सकता है। इस रोग के बाद में छलियों के पंख तथा पूछ करने लगती है। ऐसी अवस्था में फोलिक एसिड को भोजन के साथ मिलाकर इमेक्वेल दवा 10ml प्रति 100 लीटर पानी में मिलाकर रोग ग्रस्त मछली को करीब 24 घंटे तक घोल में रखना चाहिए।

एक और मुख्य रोग है अल्सर, इसके लक्षणों में शरीर तथा पूछ पर घाव का पाया जाना होता है इसके उपचार में 5 मिली. की दर से तालाब में पोटाश का प्रयोग किया जाना चाहिए बीमारी अल्सरेटिव सिंड्रोम इसकी प्रारंभिक अवस्था है लाल दाग जो धीरे-धीरे गहरे होकर सड़ने लगते हैं अंत में मछली की मृत्यु हो जाती है

इसके उपचार में 1 लीटर सिफैक्स प्रति हेक्टेयर में इस्तेमाल कर सकते हैं जब तक मछलियां तैयार नहीं हो जाती तब तक आपको उनकी पूरी सुरक्षा करनी पड़ेगी जब 1 वर्ष में आप की मछलियां एक से डेढ़ किलोग्राम तक की हो जाए तो समझ लीजिए कि आप की मछलियां बाजार में बेचने लायक तैयार हो गई है तालाब से मछली बाहर निकालते वक्त उन्हें जाल का प्रयोग करें जिन से मछलियों को कोई नुकसान ना पहुंचे

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